30 साल बाद रतनसिंह को मिला असली नाम

त्वरित न्याय का अहसास करा रहे हैं राजस्व लोक अदालत शिविर

 

उदयपुर.         राजस्थान सरकार के ग्राम्य सरोकारों के बखूबी निर्वहन की प्रतिबद्धता दर्शाने वाले राजस्व लोक अदालत अभियान न्याय आपके द्वार शिविर आम ग्रामीणों को त्वरित न्याय का अहसास करा रहे हैं।

जिन कामों के लिए ग्रामीण अर्से से प्रयत्नशील थे वे सारे के सारे काम कुछ ही घण्टों में पूर्ण होना ग्रामीणों के लिए किसी आकस्मिक सुकून से कम नहीं है।  सरकार के इन शिविरों की बदौलत हाथों-हाथ अपने काम हो जाने की खुशी ग्रामीणों की जुबाँ से अच्छी तरह सुनी जा सकती है।

 

        खुशी पाकर लौटता है हर कोई

न्याय आपके द्वार शिविरों से झर रहा न्याय गाँवों की हवाओं में घुल कर राज का महिमा गान कर रहा है। इन ग्रामीणों के लिए यह शिविर गाँवाई उत्सवों का रूप ले चुके हैं जहाँ जो कोई अपने नए-पुराने कामों को लेकर आता है, प्रसन्नता के साथ लौटता है।

शिविरों में अधिकांश प्रकरण नामों में शुद्धि के आ रहे हैं जिनके न हो  पाने की वजह से न स्वामित्व का अहसास हो पाता है, न किसी और प्रकार की योजनाओं का लाभ मिल पाता है। सब जगह दस्तावेजों में सही नाम और समानता होनी जरूरी है। इस लिहाज से ग्राम्याचंलों में संचालित राजस्व लोक अदालत न्याय आपके द्वार शिविर न्याय दिलाने के धाम साबित हो रहे हैं।

 

        उदयपुर में बही राहत की भगीरथी

खासकर राजस्थान के जनजाति बहुत उदयपुर संभाग में राजस्व लोक अदालत न्याय आपके द्वार शिविर लोक राहत की भगीरथी बने हुए हैं।

इसी तरह के न्याय का वरदान पाया उदयपुर जिले के झाड़ोल उपखण्ड क्षेत्र अन्तर्गत देवड़ावास गांव के रहने वाले रतनसिंह पिता शम्भूसिंह ने। इसमें नामान्तरण के समय रतनसिंह का बचपन का नाम भोपालसिंह दर्ज होने के अदालत में वाद विचाराधीन था।

यह मामला कोल्यारी में हाल ही आयोजित शिविर में उपखण्ड अधिकारी त्रिलोकचन्द मीणा के समक्ष आया।  इस पर वाद संख्या 77/2015 धारा 88 की ग्रामीणों के समक्ष सुनवाई कर वादी-प्रतिवादी की सहमति के अनुसार सही नाम रतनसिंह पिता शम्भूसिंह राजपूत दर्ज कराने डिक्री प्रदान की गई।

वर्षों बाद अपना असली नाम दर्ज होने की खुशी रतनसिंह ने सभी का आभार जताकर की और कहा कि वह जिसके लिए प्रयासरत था, सरकार ने गाँव के मुहाने खुद पहुंच कर उसे राहत का अहसास करा दिया।


correspondent

DesertTimes.in

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