उज्जैन- महाकाल मंदिर में भीड़ ने भस्मारती द्वार तोड़ा

उज्जैन। शुक्रवार सुबह आक्रोशित भीड़ ने मंदिर का भस्मारती द्वार तोड़ दिया। इससे आपाधापी की स्थिति निर्मित हो गई। भीड़ में दबने से बचने के लिए लोग द्वार के समीप रैलिंग लांघ कर एटीएम परिसर में घुस गए। पुलिस को भीड़ नियंत्र करने के लिए काफी मशक्कत करना पड़ी। अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए घटना के बाद मंदिर के आसपास और पुलिस बल तैनात किया गया।

भारी भीड़ के कारण स्थिति अनियंत्रित हो गई थी। इसके बाद मंदिर प्रशासन ने गेट पर ताला डाल जड़ दिया था और सशुल्क दर्शन पास की बिक्री भी बंद कर दी थी। लेकिन मंदिर के आईटी विभाग के जिम्मेदार 250 रुपए के ऑनलाइन दर्शन पास की बिक्री बंद करना भूल गए।

नतीजतन सैकड़ों लोगों ने ऑनलाइन पास खरीद लिया। शुक्रवार सुबह श्रद्धालु जब पास लेकर भस्मारती प्रवेश द्वार पर पहुंचे, तो वहां ताला लगा हुआ था। इससे लोग आक्रोशित हो गए और मंदिर में प्रवेश की मांग करने लगे। जब उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं मिला तो उनके सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने भस्मारती गेट तोड़ दिया।

गंभीर खामी, भस्मारती की बुकिंग

मामले में नईदुनिया ने पड़ताल की तो मंदिर के सर्वर विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों की गंभीर खामी सामने आई। सिंहस्थ में भस्मारती की ऑनलाइन बुकिंग बंद होने के बावजूद कुछ लोगों ने 19 और 20 मई की नंदी मंडपम् की ऑनलाइन बुकिंग करा ली । जिन लोगों की बुकिंग हुई उसकी सूचना वेबसाइट पर भी डली है।

हर बार मामला दबा देते हैं अफसर

बीते सालों में सर्वर विभाग से जुड़े कई गंभीर मामले सामने आए हैं। लेकिन हर बार मंदिर समिति के आला अफसर इन पर पर्दा डाल देते हैं। इस बार भी अधिकारी जांच की बात कह रहे हैं। जबकी आईटी व्यवस्था को संभाल रहे अधिकारी ने खुद गलती की जिम्मेदारी ले ली है।

करीब 6 माह पहले लाखों रुपए का भस्मारती अनुमति घोटाला सामने आया था। मामले में अधिकारियों ने तीन कर्मचारियों को निलंबित कर जांच के आदेश दे दिए। बाद में जांच ठंडे बस्ते में चली गई और मामले से जुड़े सर्वर के बड़े पद पर बैठे अधिकारी बच गए।

भस्मारती घोटाले में निलंबित एक कर्मचारी सर्वर प्रभारी, आईटी सेल प्रमुख व उनके सहायक के खिलाफ पुख्ता सबूत लेकर भटकता रहा, लेकिन किसी भी अधिकारी ने उसकी नहीं सुनी।


correspondent

DesertTimes.in

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