स्वस्थ हृदय का आधार – सात्विक जीवन और राजयोग – डॉ गुप्ता

आबू रोड.  खुद को देखने और सहेजने का प्रयास हमे हर प्रकार के रोगों से बचा सकता है। क्योंकि बीमारी का सम्बन्ध सीधे मन से होता है। जब हमारा मन स्वस्थ और स्वच्छ होगा तब हम हर बीमारी को अपने कंट्रोल में कर सकते हैं। ऐसा ही कुछ कैड कार्यक्रम में आये लोगों के भ्ीा अनुभव हैं। उक्त उदगार ब्रह्माकुमारीज संस्था की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने व्यक्त किये। वे ब्रह्माकुमारीज संस्था के शांतिवन में आयोजित कैड कार्यक्रम में लोगों को सम्बोधित कर रही थी।
उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे पाश्चात्य जीवनशैली छोडक़र भारतीय जीवनशैली में सकारात्मकता और अध्यात्म का समावेश करें। जिससे जीवन में संतुलन और शक्ति का विकास हो सके।
ह्दयरोग विशेषज्ञ डा सतीष गुप्ता ने कहा कि आज के इस तेज़ रफ़्तार से भाग रही जि़न्दगी में आज हमारे पास स्वयं के लिए भी समय नहीं है। इसी रफ़्तार से हृदयरोग भी बढ़ता जा रहा है। पूरे विश्व की तुलना में भारत में तेजी से हृदय रोग की बीमारियां तेजी से बढ़ती जा रही हैं। विशेषज्ञों की मानें तो भारत में विश्व की तुलना में 5 गुना ज्यादा हृदय रोगी हैं यदि ऐसे ही ह्दयरोग बढ़ता रहा तो आने वाले समय में भारत में ह्दयरोग का व्यापक असर हो जायेगा।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन शैली के जरिये ह्दयरोग पर नियंत्रण पाना है तो स्वस्थ जीवन शैली और स्वस्थ मन के लिए मैडिटेशन को जीवन का हिस्सा बनाना होगा। कुछ आंकड़े बताते हुए डॉ गुप्ता ने बताया कि गत वर्ष में हृदयाघात के कारण करीब 29 लाख लोगो की मृत्यु हुयी , जिनमें से लगभग 15 लाख 50 वर्ष से कम आयु के थे । भाग दौड़ भरी जि़न्दगी के कारण ही आज कम उम्र में ऐसी विषम ह्रदयरोग की समस्याए आ रही हैं । डी.र.डी.ओ तथा डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी की प्रेरणा से शुरू हुए इस शोध को विश्व के सभी डॉक्टर्स ने बहुत सराहा है तथा इसके अश्चार्यजनक परिणामों से प्रेरणा भी ली है । एक वैश्विक शोध संस्था के अनुसार डॉ गुप्ता द्वारा इस सन्दर्भ में लिखा हुआ शोध पत्र विश्व के प्रथम 20 शोध पत्रों में विगत 3 वर्षों से प्रथम स्थान पर रहा है तथा विश्व भर से 4.5 करोड़ से भी अधिक लोगों ने एस शोध पत्र का अध्ययन किया है ।
इससे पूर्व 130 विभिन्न सत्रों में 1000 से भी अधिक हृदय रोगियों ने इस कैड प्रोग्राम का लाभ उठाया है जिसमे उन्होंने जीवन शैली तथा परमात्म योग के द्वारा हृदय रोग के साथ शरीर की अन्य बीमारियां तथा व्यसनों से भी छुटकारा पाया। इस सन्दर्भ में कुछ लोगों ने अपना अनुभव बताया कि कैसे उनके हृदय धमनियों के ब्लॉकेज बिना किसी बाईपास सर्जरी अथवा एंजियोप्लास्टी के 100 प्रतिशत 30 प्रतिशत तक पहुँच मात्र 1 वर्ष में खुल गए ।
कार्यक्रम के शुभाराम्भ के अवसर पर संस्था के सूचना निदेशक राजयोगी बी.के करुणा तथा राजयोगिनी बी.के गीता ने भी अपने हृदय के उदगार प्रस्तुत किये तथा सभी आये हुए लोगों को विश्वास दिलाया कि परमात्म योग द्वारा हृदय रोग तो क्या, किसी भी विषम बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है।


correspondent

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